यह प्रेम नहीं

(इस कविता में जो लिखा है उसका अर्थ तो समझिए ही साथ ही साथ उसके उलट जो आज के युग में होता है वह भी सोचिये)(कविता को लयबद्ध पद्य की शैली में लिखा है, यदि उस लहजे से पढ़ा जाए तो अलग आनंद मिलेगा 🙂) काल का चक्र जो चलता है,किसी के लिए नहीं ये…

The Mango Tree

There I was, sitting under the Mango tree planted in the front yard of my home. My track pant was smudged with earth along with my T-shirt as if I had been rolling around in the mud but I couldn’t care less. I used to live in one of those big government quarters provided by…

सब चुप क्यों हैं?

(कल्पना करिए आप 12-15 वर्ष पहले के भारत में हैं। जैसे जैसे मैं समय में आगे बढूंगा आप समझते जाएंगे) रोज़ाना चलते जीवन के यापन में, सब चुप क्यों हैं? अंतर्द्वंद के स्थापन से भी, सब चुप क्यों हैं?   सर उठा कर देखते हैं जब लोग, पता लगता है कि रास्ते तो अब खाली…

पार तो फिर भी करना होगा

Inspired from and Dedicated to Shri Atal Bihari Vajpayee हो राह में यदि आकाश,सूर्य की तरफ उड़ना होगा,बीच तड़ित से चमकते बादलों कोपार तो फिर भी करना होगा। जब नदी में हो वेग गजब,और नौका फंसी मझधारों में,धैर्य तो फिर भी धरना होगा,पार तो फिर भी करना होगा। विपरीत दिशा की धारा में,चप्पू चलाते रहना…

Chances

Take your chances, O’ lonely soul, Lest the passions are abating, Seek the comforts of present not the past, for The time rushes while these keep on debating. Worried of the chances that you will lose? But equal are that of winning, if not more, What use is such caution in what to choose? When…

मृत्यु से मुलाकात

निकल पड़ा मैं घर से किसी बात पे,क्रोधित था मन उस दिन दुनिया के हालात पे,उचटा हुआ मन लिए पहुंचा एक सूने मैदान में,सहसा सन्नाटे से ठिठका, हुआ थोड़ा हैरान मैं । दूर दूर तक न कोई मनुष्य नज़र आता था,न ही आकाश से कोई पंछी चहचहाता था,रोशनी भी धीरे धीरे ढल रही थी,धूल समेटे…

विपक्ष की बात

भारतवर्ष की भूमि परजब शीत ऋतु लहराती थी,असावधान बैठी देहों पर,क्रूरता बरसाती जाती थी। हंसते-रोते, चलते-सोते रोजमर्रा के जीवन ढोते,लोगों के जीवन मे एक दिन आया ऐसा निराला थालोकतंत्र का गान करके कुछ जनों ने,देश के हृदय पर तेज़ चुभोया एक भाला था।सुबह का अखबार जैसे अपने साथ उल्टी स्वतंत्रता लाया था,लगता था ठंड ने…

What is Life?

They say that life is all this, and more,
And one faces all these above,
But to be wise is a rarer gift,
And rarer is to act on it.

पाप की परिभाषा

आज के कलियुग में जहाँपाप-व्यभिचार सदा-सद पलता हैइस शहर-उस शहर, हर नगर, हर देश सेहंसते-मुस्कराते, हाथ हिलाते, सिर उठा निकलता है। राह चलते हुए राहगीरों को वह पकड़ता हैहर किसी के मन को वह अंततः जकड़ता हैऔर गलत राह पर ले जा कर वह अकड़ता है (जो मन मे एक बार पाप को बसा लेता…

आज़ाद

कहते हैं कि भारतवर्ष में आज़ादी की आजकल नई घटा है छायी, जब अपने ही वीर सपूतों की निंदा करने की कुछ लोगों ने है स्वतंत्रता पायी। अपने ही हाथों जिनसे मातृभूमि का गला घोंटा जाता है, उन लोगों को आजकल देश में आज़ाद कहा जाता है। रहते हैं जो उच्च दबाव में, तूफानों में,…